Atharvaveda / 1 / 12 / 4
शं मे॒ पर॑स्मै॒ गात्रा॑य॒ शम॒स्त्वव॑राय मे। शं मे॑ च॒तुर्भ्यो॒ अङ्गे॑भ्यः॒ शम॑स्तु त॒न्वे॑३ मम॑ ॥4॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 1 | Sukta : 12 | Paryay : | Mantra No : 4
In English:
Seer : bhRRigva~NgiraaH | Devta : yakShmanaashanam | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : sha.m me parasmai gaatraaya shamastvavaraaya me. sha.m me chaturbhyo a~NgebhyaH shamastu tanve3 mama .4.
Component Words : sham . me . parasmai . gaatraaya . sham . astu . avaraaya . me .sham . me . chatuH.abhyaH . a~NgebhyaH . sham . astu . tanve . mama .
In Hindi:
ऋषि : भृग्वङ्गिराः | देवता : यक्ष्मनाशनम् | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : रोगनिवृत्ति का उपदेश।
पदपाठ : शम् । मे॒ । पर॑स्मै । गात्रा॑य । शम् । अ॒स्तु॒ । अव॑राय । मे॒ ।शम् । मे॒ । च॒तु:ऽभ्य॑: । अङ्गे॑भ्य: । शम् । अ॒स्तु॒ । त॒न्वे । मम॑ ॥
पदार्थ : (मे) मेरे (परस्मै) ऊपर के (गात्राय) शरीर के लिये (शम्) सुख और (मे) मेरे (अवराय) नीचे के शरीर के लिये (शम्) सुख (अस्तु) होवे। (मे) मेरे (चतुर्भ्यः) चारों (अङ्गेभ्यः) अङ्गों के लिये (शम्) सुख और (मम) मेरे (तन्वे) सब शरीर के लिये (शम्) सुख (अस्तु) होवे ॥४॥"
भावार्थ : चारों अङ्ग दो हाथ और दो पद हैं। मनुष्य को योग्य है कि परमेश्वर की प्रार्थनापूर्वक अपने सब अमूल्य शरीर को प्रयत्न से सर्वथा स्वस्थ रक्खे और मानसिक बल बढ़ा कर संसार में उपकारी हो और सदा सुख भोगे ॥४॥
टिप्पणी :४−परस्मै। १।८।३। श्रेष्ठाय, उपरि वर्तमानाय। गात्राय। गमेरा च। उ० ४।१६९। इति गम्लृ-त्रन्, मस्य आकारः। गच्छति चेष्टतेऽनेन। अङ्गाय, शरीराय। अवराय। १।८।३। निकृष्टाय, अवस्ताद् वर्तमानाय। चतुः-भ्यः। चतुःसंख्येभ्यः। द्वौ हस्तौ, द्वौ पादौ−इति चत्वारि तेभ्यः। अङ्गेभ्यः। अङ्ग पदे=गतौ-अच्। अङ्गयति चेष्टतेऽनेन। अवयवेभ्यः, गात्रेभ्यः। तन्वे। म० १। शरीराय सर्वस्मै ॥