Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Atharvaveda / 2 / 29 / 1

पार्थि॑वस्य॒ रसे॑ देवा॒ भग॑स्य त॒न्वो॑३ बले॑। आ॑यु॒ष्य॑म॒स्मा अ॒ग्निः सूर्यो॒ वर्च॒ आ धा॒द्बृह॒स्पतिः॑ ॥ 1॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 2 | Sukta : 29 | Paryay : | Mantra No : 1

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : अग्निः, आयुः, बृहस्पतिः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :

विषय : मनुष्य अपनी उन्नति करता रहे, इसका उपदेश।

पदपाठ : पार्थि॑वस्य । रसे॑ । दे॒वा॒: । भग॑स्य । त॒न्व᳡: । बले॑ । आ॒यु॒ष्य᳡म् । अ॒स्मै । अ॒ग्नि: । सूर्य॑: । वर्च॑: । आ । धा॒त् । बृ॒ह॒स्पति॑: ॥२९.१॥

पदार्थ : (देवाः) हे व्यवहारकुशल, महात्माओं ! (अग्निः) सर्वव्यापक, (सूर्यः) लोकों में चलनेवाला, वा लोकों का चलानेवाला, (बृहस्पतिः) बड़े-बड़े [ब्रह्माण्डों] का रक्षक परमेश्वर ! (पार्थिवस्य) पृथिवी पर वर्त्तमान (भगस्य) ऐश्वर्य के (तन्वः) विस्तार के (रसे) रस अर्थात् तत्त्वज्ञान और (बले) बल में (अस्मै) इस [जीव] को (आयुष्यम्) आयु बढ़ानेवाला (वर्चः) तेज [शरीरकान्ति और ब्रह्मवर्चस] (आ) सब ओर से (धात्=धत्तात्) देवे ॥१॥"

भावार्थ : मनुष्य विद्वानों के सत्सङ्ग से आध्यात्मिक पक्ष में परमेश्वर के ज्ञान से और आधिभौतिक पक्ष में (अग्नि) जो बिजुली आदि रूप से सब शरीरों में बड़ा उपयोगी पदार्थ है और (सूर्य) जो अनेक बड़े-बड़े लोकों को अपने आकर्षण आदि में रखता है, इनके विज्ञान से, अपनी शरीरकान्ति और आत्मिकशक्ति बढ़ावें और पृथिवी आदि पदार्थों के सारतत्त्व से उपकार लेकर प्रतापी, यशस्वी और चिरंजीवी बनें ॥१॥

टिप्पणी :१–पार्थिवस्य। अ० २।२८।३। भूमेः सम्बन्धिनः। रसे। रस स्वने आस्वादे–अच्। सारे शरीरपुष्टौ। देवाः। हे व्यवहारकुशला विद्वांसः। भगस्य। अ० १।१४।१। भज सेवायाम्–घ। ऐश्वर्यस्य। तन्वः। अ० १।१। विस्तारस्य। बले। आत्मशरीरसामर्थ्ये। आयुष्यम्। तस्मै हितम्। पा० ५।१।५। आयुष्–यत्। जीवनवर्धकम्। अस्मै। निर्दिष्टप्राणिने। अग्निः। व्यापकः। तेजोविशेषः। सूर्यः। अ० १।३।५। राजसूयसूर्य०। पा० ३।१।११४। अत्र सिद्धान्तकौमुदीटीकायां भट्टोजिदीक्षितः। “सरत्याकाशे सूर्यः। यद्वा सुवति कर्मणि लोकं प्रेरयतीति”। परमेश्वरः। सूर्यलोकः। वर्चः। तेजः शरीरकान्तिर्ब्रह्मवर्चसं च। आ। समन्तात्। यथाविधि। धात्। छान्दसं रूपम्। धत्तात्। धेयात्। स्थापयतु। बृहस्पतिः। अ० १।८।२। महतां पृथिव्यादिलोकानां रक्षकः प्रकाशवृष्टिदानेनाकर्षणेन च। परमात्मा। सूर्यः ॥