Atharvaveda / 5 / 7 / 7
प॒रोऽपे॑ह्यसमृद्धे॒ वि ते॑ हे॒तिं न॑यामसि। वेद॑ त्वा॒हं नि॒मीव॑न्तीं नितु॒दन्ती॑मराते ॥ 7॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 7 | Paryay : | Mantra No : 7
In English:
Seer : atharvaa | Devta : araatisamuuh | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : paro.apehyasamRRiddhe vi te heti.m nayaamasi. veda tvaaha.m nimiivantii.m nitudantiimaraate . 7.
Component Words : paraH . apa . ihi . asam.aRRighde . vi . te . hetim . nayaamasi . veda . tvaa . aham . ni.amiivantiim . ni.atudantiim . araate .7.7.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अरातिसमूह | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : पुरुषार्थ करने के लिये उपदेश।
पदपाठ : प॒र: । अप॑ । इ॒हि॒ । अ॒स॒म्ऽऋ॒घ्दे॒ । वि । ते॒ । हे॒तिम् । न॒या॒म॒सि॒ । वेद॑ । त्वा॒ । अ॒हम् । नि॒ऽमीव॑न्तीम् । नि॒ऽतु॒दन्ती॑म् । अ॒रा॒ते॒ ॥७.७॥
पदार्थ : (असमृद्धे) हे असमृद्धि ! (परः) परे (अप इहि) चली जा, (ते) तेरी (हेतिम्) बरछी को (वि नयामसि) हम अलग हटाते हैं। (अराते) हे अदान शक्ति ! [निर्धनता !] (अहम्) मैं (त्वा) तुझको (निमीवन्तीम्) निर्बल करनेवाली और (नितुदन्तीम्) भीतर चुभनेवाली (वेद) जानता हूँ ॥७॥ "
भावार्थ : मनुष्य महादुःखदायिनी निर्धनता को प्रयत्नपूर्वक हटावें ॥७॥
टिप्पणी :७−(परः) परस्तात् दूरदेशे (अप इहि) अपगच्छ (असमृद्धे) हे असम्पत्ते (वि) पृथक् (ते) तव (हेतिम्) हननशक्तिम् (नयामसि) नयामः प्रापयामः (वेद) जानामि (त्वा) त्वाम् (अहम्) (नि मीवन्तीम्) नि निषेधे+मीव स्थौल्ये−शतृ, ङीप्। क्षीणस्थौल्यं निर्बलं कुर्वतीम् (नि तुदन्तीम्) तुद व्यथने−शतृ। नितरां व्यथयन्तीम् (अराते) अदानशक्ते ॥