Atharvaveda / 5 / 16 / 7
यदि॑ सप्तवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥ 7॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 16 | Paryay : | Mantra No : 7
In English:
Seer : vishvaamitraH | Devta : ekavRRiShaH | Metre : saamnyuShNik | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : yadi saptavRRiSho.asi sRRijaaraso.asi . 7.
Component Words : yadi . sapta.avRRiShaH . asi . sRRija . arasaH . asi .16.7.
In Hindi:
ऋषि : विश्वामित्रः | देवता : एकवृषः | छन्द : साम्न्युष्णिक् | स्वर :
विषय : पुरुषार्थ का उपदेश।
पदपाठ : यदि॑ । स॒प्त॒ऽवृ॒ष: । असि॑ । सृ॒ज । अ॒र॒स: । अ॒सि॒ ॥१६.७॥
पदार्थ : (यदि) जो तू (सप्तवृषः) सात [ऋषियों, पाँच ज्ञानेन्द्रिय मन और बुद्धि] पर समर्थ (असि) है, [सुख] (सृज) उत्पन्न कर, [नहीं तो] तू (अरसः) निर्बल (असि) है ॥७॥"
भावार्थ : टिप्पणी :७−(सप्तवृषः) सप्त ऋषयः षडिन्द्रियाणि विद्या सप्तमी−निरु० १२।३७। सप्त ऋषिषु पञ्चज्ञानेन्द्रियमनोबुद्धिषु समर्थः ॥