Atharvaveda / 6 / 10 / 3
दि॒वे चक्षु॑षे॒ नक्ष॑त्रेभ्यः॒ सूर्या॒याधि॑पतये॒ स्वाहा॑ ॥ 3॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 6 | Sukta : 10 | Paryay : | Mantra No : 3
In English:
Seer : shantaati | Devta : suuryaH | Metre : saamnii bRRihatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : dive chakShuShe nakShatrebhyaH suuryaayaadhipataye svaahaa . 3.
Component Words : dive . chakShuShe . nakShatrebhyaH . suuryaaya . adhi.apataye . svaahaa .10.3.
In Hindi:
ऋषि : शन्ताति | देवता : सूर्यः | छन्द : साम्नी बृहती | स्वर :
विषय : स्वास्थ्य की रक्षा का उपदेश।
पदपाठ : दि॒वे । चक्षु॑षे । नक्ष॑त्रेभ्य: । सूर्या॑य । अधि॑ऽपतये । स्वाहा॑ ॥१०.३॥
पदार्थ : (चक्षुषे) दृष्टिशक्ति के लिये (दिवे) प्रकाश को, और (नक्षत्रेभ्यः) नक्षत्रों के लिये (अधिपतये) [प्रकाश के] बड़े रक्षक (सूर्याय) सूर्य को (स्वाहा) सुन्दर स्तुति है ॥३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :३−(दिवे) प्रकाशाय (चक्षुषे) दर्शनशक्तये (नक्षत्रेभ्यः) नक्षत्रज्ञानेभ्यः (सूर्याय) अ० १।३।५। लोकप्रेरकाय दिवाकराय (अधिपतये) प्रकाशस्य महारक्षकाय ॥