Atharvaveda / 6 / 16 / 4
अ॑ल॒साला॑सि॒ पूर्वा॑ सि॒लाञ्जा॑ला॒स्युत्त॑रा। नी॑लागल॒साला॑ ॥4॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 6 | Sukta : 16 | Paryay : | Mantra No : 4
In English:
Seer : shaunak | Devta : chandramaaH | Metre : tripadaa pratiShThaa gaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : alasaalaasi puurvaa silaa~njaalaasyuttaraa. niilaagalasaalaa .4.
Component Words : alasaalaa . asi . puurvaa . silaa~njaalaa . asi . uttaraa . niilaagalasaalaa .16.4.
In Hindi:
ऋषि : शौनक् | देवता : चन्द्रमाः | छन्द : त्रिपदा प्रतिष्ठा गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्म के गुणों का उपदेश।
पदपाठ : अ॒ल॒साला॑ । अ॒सि॒ । पूर्वा॑ । सि॒लाञ्जा॑ला । अ॒सि॒ । उत्त॑रा । नी॒ला॒ग॒ल॒साला॑ ॥१६.४॥
पदार्थ : [हे परमेश्वर !] तू (अलसाला) आलसियों को रोकनेवाली (पूर्वा) प्रधान शक्ति (असि) है, और तू (सिलाञ्जाला) कण-कण को प्रकट करनेवाली और (नीलागलसाला) सब लोकों के घर [ब्रह्माण्ड में] व्यापक (उत्तरा) अति उत्तम शक्ति (असि) है ॥४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :४−(अलसाला) अलस+अला। न लसतीति, लस दीप्तौ−अच्+अल वारणे−अच्, टाप्। अलसान् क्रियामन्दान् वारयति सा (असि) (पूर्वा) प्रधाना शक्तिः (सिलाञ्जाला) पिल कणश आदाने−क। पतिचण्डिभ्यामालञ्। उ० १।११७। इति सिल+अञ्जू व्यक्तिम्रक्षणकान्तिगतिषु−आलञ्। सिलान् कणान् कणान् अनक्ति प्रकटयतीति सा (उत्तरा) उत्कृष्टतरा शक्ति (नीलागलसाला) नील+आगल+साला। नि+इल गतौ−क। डलयौरैक्यम्। ॠदोरप्। पा० ३।३।७७। इति आड्+गॄ निगरणे−अप्, रस्य लः। षल गतौ−घञ्, टाप्। नीलानां नीडानां निवासस्थानां लोकानाम् आगले आगरे आगारे गृहे ब्रह्माण्डे व्यापिका ॥