Atharvaveda / 9 / 6 / 2 / 12
प्र॒जाप॑ते॒र्वा ए॒ष वि॑क्र॒मान॑नु॒विक्र॑मते॒ य उ॑प॒हर॑ति ॥ 12॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 2 | Sukta : 6 | Paryay : 8 | Mantra No : 12
In English:
Seer : brahmaa | Devta : atithiH, vidyaa | Metre : saamnii triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : prajaapatervaa eSha vikramaananuvikramate ya upaharati . 12.
Component Words : prajaa.apateH . vai . eShaH . vi.akramaan . anu.avikramate . yaH . upa.aharati .7.12.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : साम्नी त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।
पदपाठ : प्र॒जाऽप॑ते: । वै । ए॒ष: । वि॒ऽक्र॒मान् । अ॒नु॒ऽविक्र॑मते । य: । उ॒प॒ऽहर॑ति ॥७.१२॥
पदार्थ : (एषः वै) वही [गृहस्थ] (प्रजापतेः) प्रजापति [प्रजापालक परमेश्वर वा मनुष्य] के (विक्रमान्) विक्रमों [पराक्रमों] का (अनुविक्रमते) अनुकरण करके विक्रम करता है, (यः) जो [अन्न] (उपहरति) भेंट करता है ॥१२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१२−(प्रजापतेः) प्रजापालकस्य परमेश्वरस्य मनुष्यस्य वा (वै) (एषः) गृहस्थः (विक्रमान्) पराक्रमान् (अनुविक्रमते) अनुसृत्य पराक्रमान् करोति। अन्यत् पूर्ववत् ॥