Atharvaveda / 10 / 1 / 23
भ॑वाश॒र्वाव॑स्यतां पाप॒कृते॑ कृत्या॒कृते॑। दु॒ष्कृते॑ वि॒द्युतं॑ देवहे॒तिम् ॥ 23॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 10 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 23
In English:
Seer : pratya~NgirasaH | Devta : kRRityaaduuShaNam | Metre : tripadaa bhurigviShamaa gaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : bhavaasharvaavasyataa.m paapakRRite kRRityaakRRite. duShkRRite vidyuta.m devahetim . 23.
Component Words : bhavaasharvau . asyataam . paapa.akRRite . kRRityaa.akRRite . duH.akRRite . vi.adyutam . deva.ahetim .1.23.
In Hindi:
ऋषि : प्रत्यङ्गिरसः | देवता : कृत्यादूषणम् | छन्द : त्रिपदा भुरिग्विषमा गायत्री | स्वर :
विषय : राजा के कर्तव्य दण्ड का उपदेश।
पदपाठ : भ॒वा॒श॒र्वौ । अ॒स्य॒ता॒म् । पा॒प॒ऽकृते॑ । कृ॒त्या॒ऽकृते॑ । दु॒:ऽकृते॑ । वि॒ऽद्युत॑म् । दे॒व॒ऽहे॒तिम् ॥१.२३॥
पदार्थ : (भवाशर्वौ) सुख देनेवाले और दुःख नाश करनेवाले [राजा और मन्त्री दोनों] (पापकृते) पाप करनेवाले (कृत्याकृते) हिंसा करनेवाले और (दुष्कृते) दुष्कर्मी पुरुष के लिये (देवहेतिम्) विद्वानों के वज्र (विद्युतम्) बिजुली [के शस्त्र] को (अस्यताम्) गिरावें ॥२३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२३−(भवाशर्वौ) अ० ८।२।७। सुखस्य भावयिता कर्ता भवो राजा, दुःखस्य शरिता नाशकः शर्वो मन्त्री च तौ (अस्यताम्) प्रेरयताम् (पापकृते) पापकारिणे (कृत्याकृते) म० २। हिंसाकारिणे (दुष्कृते) दुष्कर्मिणे (विद्युतम्) अशनिरूपं शस्त्रम् (देवहेतिम्) विदुषां वज्रम् ॥