Atharvaveda / 10 / 2 / 24
केने॒यं भूमि॒र्विहि॑ता॒ केन॒ द्यौरुत्त॑रा हि॒ता। केने॒दमू॒र्ध्वं ति॒र्यक्चा॒न्तरि॑क्षं॒ व्यचो॑ हि॒तम् ॥ 24॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 10 | Sukta : 2 | Paryay : | Mantra No : 24
In English:
Seer : naaraayaNaH | Devta : brahmaprakaashanam, puruShaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : keneya.m bhuumirvihitaa kena dyauruttaraa hitaa. kenedamuurdhva.m tiryakchaantarikSha.m vyacho hitam . 24.
Component Words : kena . iyam . bhuumiH . vi.ahitaa . kena . dyauH . ut.ataraa . hitaa . kena . idam . uurdhvam . tiryak . cha . antarikSham . vyachaH . hitam .2.24.
In Hindi:
ऋषि : नारायणः | देवता : ब्रह्मप्रकाशनम्, पुरुषः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : मनुष्यशरीर की महिमा का उपदेश।
पदपाठ : केन॑ । इ॒यम् । भूमि॑: । विऽहि॑ता । केन॑ । द्यौ: । उत्ऽत॑रा । हि॒ता । केन॑ । इ॒दम् । ऊ॒र्ध्वम् । ति॒र्यक् । च॒ । अ॒न्तरि॑क्षम् । व्यच॑: । हि॒तम् ॥२.२४॥
पदार्थ : (केन) किस करके (इयम् भूमिः) यह भूमि (विहिता) सुधारी गई है, (केन) किस करके (द्यौः) सूर्य (उत्तरा) ऊँचा (हिता) धरा गया है। (च) और (इदम्) यह (ऊर्ध्वम्) ऊँचा, (तिर्यक्) तिरछा, चलनेवाला (व्यचः) फैला हुआ (अन्तरिक्षम्) अन्तरिक्ष [आकाश] (हितम्) धरा गया है ॥२४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२४−(केन) प्रश्ने (इयम्) (भूमिः) (विहिता) विशेषेण धारिता (केन) (द्यौः) सूर्यः (उत्तरा) उपरिभवा (हिता) धृतः (केन) (इदम्) (ऊर्ध्वम्) उपरिस्थम् (तिर्यक्) वक्रगामि (च) (अन्तरिक्षम्) आकाशम् (व्यचः) विस्तृतम् (हितम्) धृतम् ॥