Atharvaveda / 10 / 6 / 24
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्। स मा॒यं म॒णिराग॑मत्स॒ह व्री॑हिय॒वाभ्यां॒ मह॑सा॒ भूत्या॑ स॒ह ॥ 24॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 10 | Sukta : 6 | Paryay : | Mantra No : 24
In English:
Seer : bRRihaspatiH | Devta : phaalamaNiH, vanaspatiH | Metre : pathyaapa~NktiH | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : yamabadhnaadbRRihaspatirdevebhyo asurakShitim. sa maaya.m maNiraagamatsaha vriihiyavaabhyaa.m mahasaa bhuutyaa saha . 24.
Component Words : yam . abadhnaat . bRRihaspatiH . devebhyaH . asura.akShitim . saH . maa . ayam . maNiH . aa . agamat . saha . vriihi.ayavaabhyaam . mahasaa . bhuutyaa . saha .6.24.
In Hindi:
ऋषि : बृहस्पतिः | देवता : फालमणिः, वनस्पतिः | छन्द : पथ्यापङ्क्तिः | स्वर :
विषय : सब कामनाओं की सिद्धि का उपदेश।
पदपाठ : यम् । अब॑ध्नात् । बृह॒स्पति॑: । दे॒वेभ्य॑: । असु॑रऽक्षितिम् । स: । मा॒ । अ॒यम् । म॒णि: । आ । अ॒ग॒म॒त् । स॒ह । व्री॒हि॒ऽय॒वाभ्या॑म् । मह॑सा । भूत्या॑ । स॒ह ॥६.२४॥
पदार्थ : (यम्) जिस (असुरक्षितिम्) असुरनाशक [वैदिक नियम] को (बृहस्पतिः) बृहस्पति [बड़े ब्रह्माण्डों के स्वामी परमेश्वर] ने (देवेभ्यः) विजयी लोगों के लिये (अबध्नात्) बाँधा है। (सः अयम्) बही (मणिः) मणि [प्रशंसनीय वैदिक नियम] (मा) मुझे (व्रीहियवाभ्याम् सह) चावल और जव के साथ और (महसा) बड़ाई और (भूत्या सह) विभूति [सम्पत्ति] के साथ (आ अगमत्) प्राप्त हुआ है ॥२४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२४−(महसा) महत्त्वेन (भूत्या) सम्पत्या। अन्यत् सुगमम् ॥