Atharvaveda / 11 / 2 / 26
मा नो॑ रुद्र त॒क्मना॒ मा वि॒षेण॒ मा नः॒ सं स्रा॑ दि॒व्येना॒ग्निना॑। अ॒न्यत्रा॒स्मद्वि॒द्युतं॑ पातयै॒ताम् ॥ 26॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 11 | Sukta : 2 | Paryay : | Mantra No : 26
In English:
Seer : atharvaa | Devta : rudraH | Metre : viraaDgaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : maa no rudra takmanaa maa viSheNa maa naH sa.m sraa divyenaagninaa. anyatraasmadvidyuta.m paatayaitaam . 26.
Component Words : maa . naH . rudra . takmanaa . maa . viSheNa . maa . naH . sam . sraaH . divyena . agninaa . anyatra . asmat . vi.adyutam . paataya . etaam .2.26.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : रुद्रः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मज्ञान से उन्नति का उपदेश।
पदपाठ : मा । न॒: । रु॒द्र॒ । त॒क्मना॑ । मा । वि॒षेण॑ । मा । न॒: । सम् । स्रा॒: । दि॒व्येन॑ । अ॒ग्निना॑ । अ॒न्यत्र॑ । अ॒स्मत् । वि॒ऽद्युत॑म् । पा॒त॒य॒ । ए॒ताम् ॥२.२६॥
पदार्थ : (रुद्र) हे रुद्र ! [दुःखनाशक परमेश्वर] (मा) न तो (नः) हमें (तक्मना) दुःखी जीवन करनेवाले [ज्वर आदि] से, (मा) न (विषेण) विष से, और (मा) न (नः) हमें (दिव्येन) सूर्य के (अग्निना) अग्नि से (संस्राः) संयुक्त कर। (अस्मत्) हम से (अन्यत्र) दूसरों [अर्थात् दुराचारियों] पर (एताम्) इस (विद्युतम्) लपलपाती [बिजुली] को (पातय) गिरा ॥२६॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२६−(मा) निषेधे (नः) अस्मान् (तक्मना) अ० १।२५।१। कृच्छ्रजीवनकारिणा ज्वरादिना (मा) (विषेण) (मा) (नः) (संस्राः) म० १९। संसृज। संयोजय (दिव्येन) दिवि सूर्ये भवेन (अग्निना) तापेन (अन्यत्र) अन्येषु। दुष्टेषु (अस्मत्) अस्मत्तः (विद्युतम्) विद्योतमानां तडितम् (पातय) प्रक्षिप (एताम्) दृश्यमानाम् ॥