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Atharvaveda / 11 / 3 / 3

चक्षु॒र्मुस॑लं॒ काम॑ उ॒लूख॑लम् ॥ 3॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 11 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 3

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : बार्हस्पत्यौदनः | छन्द : आसुरी पङ्क्तिः | स्वर :

विषय : सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

पदपाठ : चक्षु॑: । मुस॑लम् । काम॑: । उ॒लूख॑लम् ॥३.३॥

पदार्थ : (चक्षुः) [उसकी] दर्शन शक्ति (मुसलम्) मूसल [समान], [उसकी] (कामः) कामना (उलूखलम्) ओखली [समान] है ॥३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :३−(चक्षुः) दृष्टिसामर्थ्यम् (मुसलम्) अ० ९।६(१)।१५। मुस खण्डने-कल, चित्। कुट्टनसाधनम् (कामः) अभिलाषः (उलूखलम्) अ० ९।६(१)।१५। धान्यादिमर्दनसाधनम् ॥