Atharvaveda / 11 / 3 / 25
याव॑द्दा॒ताभि॑मन॒स्येत॒ तन्नाति॑ वदेत् ॥ 25॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 11 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 25
In English:
Seer : atharvaa | Devta : baarhaspatyaudanaH | Metre : saamnyuShNik | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : yaavaddaataabhimanasyeta tannaati vadet . 25.
Component Words : yaavat . daataa . abhi.amanasyeta . tat . na . ati . vadet .3.25.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : बार्हस्पत्यौदनः | छन्द : साम्न्युष्णिक् | स्वर :
विषय : सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
पदपाठ : याव॑त् । दा॒ता । अ॒भि॒ऽम॒न॒स्येत॑ । तत् । न । अति॑ । व॒दे॒त् ॥३.२५॥
पदार्थ : (यावत्) जितना [ब्रह्मज्ञान] (दाता) दाता [ज्ञानदाता] (अभिमनस्येत) मन से विचारे, (तत्) उस को (अति) अधिक करके वह [ज्ञानदाता] (न वदेत) न बोले ॥२५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२५−(यावत्) यत्प्रमाणं ब्रह्मज्ञानम् (दाता) ज्ञानदाता गुरुः (अभिमनस्येत) भृशादिभ्यो भुव्यच्वेर्लोपश्च हलः। पा० ३।१।१२। अभिमनस्-क्यङ्, न सलोपः। मनसा विचारयेत् (तत्) ब्रह्मज्ञानम् (न) निषेधे (अति) अधिकम् (वदेत्) ब्रूयात् ॥