Atharvaveda / 11 / 8 / 26
प्रा॑णापा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या। व्या॑नोदा॒नौ वाङ्मनः॒ शरी॑रेण॒ त ई॑यन्ते ॥ 26॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 11 | Sukta : 8 | Paryay : | Mantra No : 26
In English:
Seer : kaurupathiH | Devta : adhyaatmam, manyuH | Metre : viraaDanuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : praaNaapaanau chakShuH shrotramakShitishcha kShitishcha yaa. vyaanodaanau vaa~NmanaH shariireNa ta iiyante . 26.
Component Words : praaNaapaanau . chakShuH . shrotram . akShitiH . cha . kShitiH . cha . yaa . vyaana.audaanau . vaak . manaH . shariireNa . te . iiyante .10.26.
In Hindi:
ऋषि : कौरुपथिः | देवता : अध्यात्मम्, मन्युः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
पदपाठ : प्रा॒णा॒पा॒नौ । चक्षु॑: । श्रोत्र॑म् । अक्षि॑ति: । च॒ । क्षिति॑: । च॒ । या । व्या॒न॒ऽउ॒दा॒नौ । वाक् । मन॑: । शरी॑रेण । ते । ई॒य॒न्ते॒ ॥१०.२६॥
पदार्थ : (प्राणापानौ) प्राण और अपान [भीतर और बाहिर जानेवाला श्वास], (चक्षुः) नेत्र, (श्रोत्रम्) कान, (च) और (या) जो (अक्षितिः) [सुख की] निर्हानि (च) और (क्षितिः) [दुःख की] हानि। (व्यानोदानौ) व्यान [सब नाड़ियों में रस पहुँचानेवाला वायु] और उदान [ऊपर को चढ़नेवाला वायु], (वाक्) वाणी और (मनः) मन, (ते) ये सब (शरीरेण) शरीर के साथ (ईयन्ते) चलते हैं ॥२६॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२६−त्रयः पादाः पूर्ववत्-म० ४। (शरीरेण) देहेन (ते) पूर्वोक्ताः पदार्थाः (ईयन्ते) ईङ् गतौ−श्यन्। गच्छन्ति। प्रवर्तन्ते ॥