Atharvaveda / 13 / 1 / 7
रोहि॑तो॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑दृंह॒त्तेन॒ स्व᳡ स्तभि॒तं तेन॒ नाकः॑। तेना॒न्तरि॑क्षं॒ विमि॑ता॒ रजां॑सि॒ तेन॑ दे॒वा अ॒मृत॒मन्व॑विन्दन् ॥ 7॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 7
In English:
Seer : brahmaa | Devta : adhyaatmam, rohitaH, aadityaH | Metre : pathyaapa~NktiH | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : rohito dyaavaapRRithivii adRRi.mhattena sva᳡ stabhita.m tena naakaH. tenaantarikSha.m vimitaa rajaa.msi tena devaa amRRitamanvavindan . 7.
Component Words : rohitaH . dyaavaapRRithivii ita.Ni . adRRi.mhat . tena . sva᳡H . stabhitam . tena . naakaH . tena . antarikSham . vi.amitaa . rajaa.msi . tena . devaaH . amRRitam . anu . avindan .1.7.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।
पदपाठ : रोहि॑त: । द्यावा॑पृथि॒वी इति॑ । अ॒दृं॒ह॒त् । तेन॑ । स्व᳡: । स्त॒भि॒तम् । तेन॑ । नाक॑: । तेन॑ । अ॒न्तरि॑क्षम् । विऽमि॑ता । रजां॑सि । तेन॑ । दे॒वा: । अ॒मृत॑म् । अनु॑ । अ॒वि॒न्द॒न् ॥१.७॥
पदार्थ : (रोहितः) सबके उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर] ने (द्यावापृथिवी) सूर्य्य और भूमि को (अदृंहत्) दृढ़ किया, (तेन) उसी करके (स्वः) सामान्य सुख [अभ्युदय] (स्तभितम्) थाँभा गया है, (तेन) उसी करके (नाकः) विशेष सुख [निःश्रेयस मोक्षसुख, थाँभा गया है]। (तेन) उसी करके (अन्तरिक्षम्) अन्तरिक्ष और (रजांसि) सब लोक (विमिता) नाप डाले गये हैं, (तेन) उससे ही (देवाः) विद्वानों ने (अमृतम्) अमरपन [उत्साहवर्धक मोक्षसुख] (अनु) निरन्तर (अविन्दन्) पाया है ॥७॥"
भावार्थ : टिप्पणी :७−(रोहितः) म० १। (द्यावापृथिवी) (अदृंहत्) दृढीकृतवान् (तेन) रोहितेन (स्वः) सामान्यसुखम्। अभ्युदयः (स्तभितम्) दृढीकृतम् (तेन) (नाकः) विशेषसुखम्। निःश्रेयसम्। मोक्षसुखम् (तेन) (अन्तरिक्षम्) (विमिता) विविधं परिमितानि (रजांसि) लोकाः (तेन) रोहितेन (देवाः) विद्वांसः (अमृतम्) अमरणम्। पुरुषार्थम् (अनु) निरन्तरम् (अविन्दन्) अलभन्त ॥