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Atharvaveda / 13 / 4 / 13

ए॒ते अ॑स्मिन्दे॒वा ए॑क॒वृतो॑ भवन्ति ॥ 13॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 13

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम् | छन्द : आसुर्युष्णिक् | स्वर :

विषय : परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदपाठ : ए॒ते । अ॒स्मि॒न् । दे॒वा: । ए॒क॒ऽवृत॑: । भ॒व॒न्ति॒ ॥४.१५॥

पदार्थ : (अस्मिन्) इस [परमात्मा] में (एते) यह सब (देवाः) चलनेवाले [पृथिवी आदि लोक] (एकवृतः) एक [परमात्मा] में वर्तमान (भवन्ति) रहते हैं ॥१३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१३−(एते) दृश्यमानाः (अस्मिन्) परमात्मनि (देवाः) गतिशीलाः पृथिव्यादिलोकाः (एकवृतः) एकस्मिन् परमात्मनि वर्तमानाः (भवन्ति) ॥