Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Atharvaveda / 13 / 4 / 22

ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्च की॒र्तिश्च॒ यश॑श्चाम्भश्च॒ नभ॑श्च ब्राह्मणवर्च॒सं चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च ॥22॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 22

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम् | छन्द : भुरिक्प्राजापत्यात्रिष्टुप् | स्वर :

विषय : परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदपाठ : ब्रह्म॑ । च॒ । तप॑: । च॒ । की॒र्ति: । च॒ । यश॑: । च॒ । अम्भ॑: । च॒ । नभ॑: । च॒ । ब्रा॒ह्म॒ण॒ऽव॒र्च॒सम् । च॒ । अन्न॑म् । च॒ । अ॒न्न॒ऽअद्य॑म् । च ॥६,१॥

पदार्थ : (ब्रह्म) वेद (च) और (तपः) ऐश्वर्य (च) और (कीर्तिः) [ईश्वरगुणों के कीर्तन और विद्या आदि गुणों से बड़ाई] (च) और (यशः) यश [शूरता आदि से नाम] (च) और (अम्भः) पराक्रम (च) और (नभः) प्रबन्धसामर्थ्य (च) और (ब्राह्मणवर्चसम्) ब्रह्मज्ञान का तेज (च) और (अन्नम्) अन्न (च च) और (अन्नाद्यम्) अन्न के समान खाने योग्य द्रव्य ॥२२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२२−(ब्रह्मः) वेदः (च) (तपः) ऐश्वर्यम्। अन्यत् पूर्ववत्-म० १४ ॥