Atharvaveda / 13 / 4 / 27
तस्ये॒मे सर्वे॑ या॒तव॒ उप॑ प्र॒शिष॑मासते ॥ 27॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 27
In English:
Seer : brahmaa | Devta : adhyaatmam | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : tasyeme sarve yaatava upa prashiShamaasate . 27.
Component Words : tasya . ime . sarve . yaavataH . upa . pra.ashiSham . aasate .6.6.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम् | छन्द : प्राजापत्यानुष्टुप् | स्वर :
विषय : परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदपाठ : तस्य॑ । इ॒मे । सर्वे॑ । या॒वत॑: । उप॑ । प्र॒ऽशिष॑म् । आ॒स॒ते॒ ॥६.६॥
पदार्थ : (इमे सर्वे) यह सब (यातवः) चलनेवाले [पृथिवी आदि लोक और प्राणी] (तस्य) उस [परमेश्वर] के (प्रशिषम्) उत्तम शासन को (उप आसते) मानते हैं ॥२७॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२७−(तस्य) परमेश्वरस्य (इमे) विद्यमानाः (सर्वे) (यातवः) कमिमनिजनिगाभायाहिभ्यश्च। उ० १।७३। या गतिप्रापणयोः-तु। गतिशीलाः पृथिव्यादिलोकाः प्राणिनश्च (प्रशिषम्) शासु अनुशिष्टौ-क्विप्। उत्तमं शासनम् (उपासते) सेवन्ते ॥