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Atharvaveda / 13 / 4 / 37

स वा अ॒द्भ्यो᳡जा॑यत॒ तस्मा॒दापो॑ऽजायन्त ॥ 37॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 37

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम् | छन्द : साम्न्युष्णिक् | स्वर :

विषय : परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदपाठ : स: । वै । अ॒त्ऽभ्य: । अ॒जा॒य॒त॒ । तस्मा॑त् । आप॑: । अ॒जा॒य॒न्‍त॒ ॥७.९॥

पदार्थ : (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (अद्भ्यः) [कार्यरूप] जल से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (आपः) जल [वृष्टि नदी कूप आदि] (अजायत) उत्पन्न हुए हैं ॥३७॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :३७−(अद्भ्यः) जलेभ्यः (आपः) वृष्टिनदीकूपादीनां जलानि। अन्यद् गतम् ॥