Atharvaveda / 14 / 1 / 1
स॒त्येनोत्त॑भिता॒ भूमिः॒ सूर्ये॒णोत्त॑भिता॒ द्यौः।ऋ॒तेना॑दि॒त्यास्ति॑ष्ठन्ति दि॒वि सोमो॒ अधि॑ श्रि॒तः ॥1॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 14 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 1
In English:
Seer : savitrii, suuryaa | Devta : som | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : satyenottabhitaa bhuumiH suuryeNottabhitaa dyauH.RRitenaadityaastiShThanti divi somo adhi shritaH .1.
Component Words : satyena . uttabhitaa . bhuumiH . suuryeNa . uttabhitaa . dyauH . RRitena . aadityaaH . tiShThanti . divi . somaH . adhi . shritaH .1.1.
In Hindi:
ऋषि : सवित्री, सूर्या | देवता : सोम | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : मन्त्र १-५, प्रकाश करने योग्य और प्रकाशक के विषय काउपदेश।
पदपाठ : स॒त्येन॑ । उत्त॑भिता । भूमि॑: । सूर्ये॑ण । उत्त॑भिता । द्यौ: । ऋ॒तेन॑ । आ॒दि॒त्या: । ति॒ष्ठ॒न्ति॒ । दि॒वि॒ । सोम॑: । अधि॑ । श्रि॒त: ॥१.१॥
पदार्थ : (सत्येन) सत्यस्वरूपपरमेश्वर करके (भूमिः) भूमि (उत्तभिता) [आकाश में] उत्तमता से थाँभी गयी है, और (सूर्येण) सूर्यलोक करके (द्यौः) प्रकाश (उत्तभिता) उत्तम रीति से थाँभा गयाहै। (ऋतेन) सत्य नियम द्वारा (आदित्याः) प्रकाशमान किरणें [वा अखण्ड सूक्ष्मपरमाणु] (तिष्ठन्ति) ठहरते हैं, और (दिवि) [सूर्य के] प्रकाश में (सोमः)चन्द्रमा (अधि) यथावत् (श्रितः) ठहरा हुआ है ॥१॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१−(सत्येन) नित्यस्वरूपेणब्रह्मणा (उत्तभिता) उत्तमतया धारिता (भूमिः) (सूर्येण) आदित्यमण्डलेन (उत्तभिता) (द्यौः)प्रकाशः (ऋतेन) सत्यनियमेन (आदित्याः) आदीप्यमानाः किरणाः। अखण्डाः सूक्ष्माःपरमाणवः (तिष्ठन्ति) वर्तन्ते (दिवि) सूर्यप्रकाशे (सोमः) चन्द्रमाः (अधि)यथाविधि (श्रितः) स्थितः ॥