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Atharvaveda / 15 / 1 / 7

नील॑मस्यो॒दरं॒लोहि॑तं पृ॒ष्ठम् ॥7॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 7

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : आसुरी पङ्क्ति | स्वर :

विषय : परमात्माऔर जीवात्मा का उपदेश अथवा सृष्टिविद्या का उपदेश।

पदपाठ : नील॑म् । अ॒स्य॒ । उ॒दर॑म् । लोहि॑तम् । पृ॒ष्ठम् ॥१.७॥

पदार्थ : (नीलम्) निश्चित ज्ञान (अस्य) उस [परमात्मा] का (उदरम्) उदर [समान है] और (लोहितम्) उत्पन्न करने कासामर्थ्य (पृष्ठम्) पीठ [समान है] ॥७॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :७−(नीलम्) नि+इल गतौ-क,। इलावाङ्नाम-निघ० १।११। नि निश्चितं ज्ञानम् (अस्य) परमात्मनः (उदरम्) उदरस्थानीयम् (लोहितम्) रुहेरश्च लो वा। उ० ३।९४। रुह बीजजन्मनि प्रादुर्भावे च-इतन्, रस्यलः। उत्पादनसामर्थ्यम् (पृष्ठम्) पृष्ठतुल्यम् ॥