Atharvaveda / 15 / 3 / 3
तस्मै॒व्रात्या॑यास॒न्दीं सम॑भरन् ॥3॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 3
In English:
Seer : atharvaa | Devta : adhyaatma athavaa vraaty | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : tasmaivraatyaayaasandii.m samabharan .3.
Component Words : tasmai . vraatyaaya . aa.asandiim . sam . abharan .3.3.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : याजुषी जगती | स्वर :
विषय : परमात्मा के विराट् रूप का उपदेश।
पदपाठ : तस्मै॑ । व्रात्या॑य । आ॒ऽस॒न्दीम् । सम् । अ॒भ॒र॒न् ॥३.३॥
पदार्थ : (तस्मै) उस (व्रात्याय) व्रात्य [सब समूहों के हितकारी परमात्मा] के लिये (आसन्दीम्)सिंहासन (सम् अभरन्) उन्होंने मिलकर रक्खा ॥३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :३−(तस्मै) तादृशाय (व्रात्याय) सर्वसमूहहितकारिणे परमात्मने (आसन्दीम्)सिंहासनम् (सम्) संगत्य (अभरन्) धारितवन्तो विद्वांसः ॥