Atharvaveda / 15 / 6 / 3
भूमे॑श्च॒ वैसो॒ऽग्नेश्चौष॑धीनां च॒ वन॒स्पती॑नां च वानस्प॒त्यानां॑ च॑ वी॒रुधां॑ चप्रि॒यं धाम॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥3॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 6 | Paryay : | Mantra No : 3
In English:
Seer : atharvaa | Devta : adhyaatma athavaa vraaty | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : bhuumeshcha vaiso.agneshchauShadhiinaa.m cha vanaspatiinaa.m cha vaanaspatyaanaa.m cha viirudhaa.m chapriya.m dhaama bhavati ya eva.m veda .3.
Component Words : bhuumeH . cha . vai . saH . agneH . cha . oShadhiinaam . cha . vanaspatiinaam . cha . vaanaspatyaanaam . cha . viirudhaam . cha . priyam . dhaama . bhavati . yaH . evam . veda .6.3.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : आर्षी पङ्क्ति | स्वर :
विषय : ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।
पदपाठ : भूमे॑: । च॒ । वै । स: । अ॒ग्ने: । च॒ । ओष॑धीनाम् । च॒ । वन॒स्पती॑नाम् । च॒ । वा॒न॒स्प॒त्याना॑म् । च॒ । वी॒रुधा॑म् । च॒ । प्रि॒यम् । धाम॑ । भ॒व॒ति॒ । य: । ए॒वम् । वेद॑ ॥६.३॥
पदार्थ : (सः) वह [विद्वान्] (वै) निश्चय करके (भूमेः) भूमि का (च च) और (अग्नेः) अग्नि का (च) और (ओषधीनाम्)ओषधियों का (च) और (वनस्पतीनाम्) वनस्पतियों का (च) और (वानस्पत्यानाम्)वनस्पतियों से उत्पन्न पदार्थों का (च) और (वीरुधाम्) लताओं का (प्रियम्) प्रिय (धाम) धाम [घर] (भवति) होता है, (यः) जो [विद्वान्] (एवम्) ऐसे वा व्यापक [व्रात्य परमात्मा] को (वेद) जानता है ॥३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :३−(धाम) गृहम् (एवम्) सू० २ म० ३। इण् गतौ-वन्।ईदृशं व्यापकं वा व्रात्यम्। अन्यद् गतं सुगमं च ॥