Atharvaveda / 15 / 13 / 2
ये पृ॑थि॒व्यांपुण्या॑ लो॒कास्ताने॒व तेनाव॑ रुन्द्धे॥2॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 13 | Paryay : | Mantra No : 2
In English:
Seer : atharvaa | Devta : adhyaatma athavaa vraaty | Metre : pathyaapa~NktiH | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ye pRRithivyaa.mpuNyaa lokaastaaneva tenaava runddhe.2.
Component Words : ye . pRRithivyaam . puNyaaH . lokaaH . taan . eva . tena . ava . rundhde .13.2.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : प्राजापत्या अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : अतिथि और अनतिथि के विषय का उपदेश।
पदपाठ : ये । पृ॒थि॒व्याम् । पुण्या॑: । लो॒का: । तान् । ए॒व । तेन॑ । अव॑ । रु॒न्ध्दे॒ ॥१३.२॥
पदार्थ : (पृथिव्याम्) पृथिवीपर (ये) जो (पुण्याः) पवित्र (लोकाः) लोक [दर्शनीय समाज] हैं, (तान्) उन समाजोंको (एव) निश्चय करके (तेन) उस [अतिथिसत्कार] से वह [गृहस्थ] (अव रुन्द्धे)सुरक्षित करता है ॥२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२−(ये) (पृथिव्याम्) भूम्याम् (पुण्याः) पवित्राः।उपकारिणः (लोकाः) दर्शनीयाः समाजाः (तान्) (एव) निश्चयेन (तेन) अतिथिसत्कारेण (अव रुन्द्धे) सुरक्षति ॥