Atharvaveda / 15 / 14 / 18
व॑षट्का॒रेणा॑न्ना॒देनान्न॑मत्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥18॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 14 | Paryay : | Mantra No : 18
In English:
Seer : atharvaa | Devta : adhyaatma athavaa vraaty | Metre : yavamadhyaakakup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : vaShaTkaareNaannaadenaannamatti ya eva.m veda .18.
Component Words : vaShaT.akaareNa . anna.aadena . annam . atti . yaH . evam . veda .14.18.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : भुरिक् प्राजापत्या अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : अतिथिके उपकार का उपदेश।
पदपाठ : व॒ष॒ट्ऽका॒रेण॑ । अ॒न्न॒ऽअ॒देन । अन्न॑म् । अ॒त्ति॒ । य: । ए॒वम् । वेद॑ ॥१४.१८॥
पदार्थ : वह [अतिथि] (अन्नादेन)जीवनरक्षक (वषट्कारेण) दानव्यवहार से (अन्नम्) जीवन की (अत्ति) रक्षा करता है, (यः) जो (एवम्) व्यापक परमात्मा को (वेद) जानता है ॥१८॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१७, १८−(ऊर्ध्वाम्)उन्नताम् (बृहस्पतिः) बृहतानां महतीनां विद्यानां रक्षकः (वषट्कारम्) वहप्रापणे-डषटि। दानव्यवहारम् (वषट्कारेण) दानव्यवहारेण। अन्यत् पूर्ववत्-म० १, २॥