Atharvaveda / 16 / 3 / 4
वि॑मो॒कश्च॑मा॒र्द्रप॑विश्च॒ मा हा॑सिष्टामा॒र्द्रदा॑नुश्च मा मात॒रिश्वा॑ च॒ माहा॑सिष्टाम् ॥4॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 16 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 4
In English:
Seer : brahmaa | Devta : aadity | Metre : aasuryanuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : vimokashchamaardrapavishcha maa haasiShTaamaardradaanushcha maa maatarishvaa cha maahaasiShTaam .4.
Component Words : vi.amokaH . cha . maa . aardra.apaviH . cha . maa . haasiShTaam . aardra.adaanuH . cha . maa . maatarishvaa . cha . maa . haasiShTaam .3.4.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : आदित्य | छन्द : प्राजापत्या त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : आयु की वृद्धि के लिये उपदेश।
पदपाठ : वि॒ऽमो॒क: । च॒ । मा॒ । आ॒र्द्रऽप॑वि: । च॒ । मा । हा॒सि॒ष्टा॒म् । आ॒र्द्रऽदा॑नु: । च॒ । मा॒ । मा॒त॒रिश्वा॑ । च॒ । मा । हा॒सि॒ष्टा॒म् ॥३.४॥
पदार्थ : (विमोकः) विमुक्तकरनेवाला गुण (च च) और (आर्द्रपविः) गतिशोधक गुण (मा) मुझे (मा हासिष्टाम्)दोनों न छोड़ें, (आर्द्रदानुः) याचकों का पालनेवाला गुण (च च) और (मातरिश्वा)ऐश्वर्य में बढ़नेवाला गुण (मा) मुझे (मा हासिष्टाम्) दोनों न छोड़ें ॥४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :४−(विमोकः)मुच्लृ मोचने-घञ् कुत्वं च। दुःखविमोचको गुणः (च) (मा) माम् (आर्द्रपविः)अर्देर्दीर्घश्च। उ० २।१८। अर्द गतौ याचने हिंसायां च-रक्+अच इः। उ० ४।१३९। पूञ्शोधने-इ प्रत्ययः। गतिशोधको गुणः (च) (मा हासिष्टाम्) न त्यजताम् (आर्द्रदानुः)अर्द याचने-रक्+दाभाभ्यां नुः। उ० ३।३२। देङ् पालने-नु। याचकपालको गुणः (मातरिश्वा) माता लक्ष्मीः, वैभवम्। श्वन्नुक्षन्पूषन्०। उ० १।१५९। मातरि+टुओश्वि गतिवृद्ध्योः-कनिन् डित्। मातरि वैभवे ऐश्वर्ये प्रवर्धको गुणः। अन्यत्पूर्ववत् ॥