Atharvaveda / 18 / 3 / 28
सोमो॑ मा॒विश्वै॑र्दे॒वैरुदी॑च्या दि॒शः पा॑तु बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑।लो॑क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ ॥28॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 18 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 28
In English:
Seer : atharvaa | Devta : yama, mantrokt | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : somo maavishvairdevairudiichyaa dishaH paatu baahuchyutaa pRRithivii dyaamivopari.lokakRRitaH pathikRRito yajaamahe ye devaanaa.m hutabhaagaa iha stha .28.
Component Words : somaH . maa . vishvaiH . devaiH . udiichyaaH . dishaH . paatu . baahu.achyutaa . pRRithivii . dyaama.aiva . upari . loka.akRRitaH . pathi.akRRitaH . yajaamahe . ye . devaanaam . huta.abhaagaaH . iha . stha .3.28.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : यम, मन्त्रोक्त | छन्द : भुरिक् जगती | स्वर :
विषय : सब दिशाओं में रक्षा का उपदेश।
पदपाठ : सोम॑: । मा॒ । विश्वै॑: । दे॒वै: । उदी॑च्या: । दि॒श: । पा॒तु॒ । बा॒हु॒ऽच्युता॑ । पृ॒थि॒वी । द्यामऽइ॑व । उ॒परि॑ । लो॒क॒ऽकृत॑: । प॒थि॒ऽकृत॑: । य॒जा॒म॒हे॒ । ये । दे॒वाना॑म् । हु॒तऽभा॑गा: । इ॒ह । स्थ ॥३.२८॥
पदार्थ : (सोमः) सर्वजनकपरमात्मा (विश्वैः) सब (देवैः) उत्तम गुणों के साथ (उदीच्याः) उत्तर वा बाईं ओरवाली (दिशः) दिशा से (मा) मेरी (पातु) रक्षा करे (बाहुच्युता) भुजाओं से उत्साहदी गयी (पृथिवी) पृथिवी (इव) जैसे (द्याम् उपरि) सूर्य पर [सूर्य के आकर्षण, प्रकाशआदि के सहारे पर, प्राणियों की रक्षा करती है] (लोककृतः) समाजों के करनेवाले, (पथिकृतः) मार्गों के बनानेवाले [तुम लोगों] को (यजामहे) हम पूजते हैं (ये) जोतुम (देवानाम्) विद्वानों के बीच (हुतभागाः) भाग लेनेवाले (इह) यहाँ पर (स्थ) हो ॥२८॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२८−(सोमः) सर्वोत्पादकः परमेश्वरः (विश्वैः) सर्वैः (देवैः) उत्तमगुणैः (उदीच्याः) उत्तरायाः। वामभागस्थायाः। अन्यत्−पूर्ववत्-म० २५ ॥