Atharvaveda / 19 / 4 / 4
बृह॒स्पति॑र्म॒ आकू॑तिमाङ्गिर॒सः प्रति॑ जानातु॒ वाच॑मे॒ताम्। यस्य॑ दे॒वा दे॒वताः॑ संबभू॒वुः स सु॒प्रणी॑ताः॒ कामो॒ अन्वे॑त्व॒स्मान् ॥4॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 4
In English:
Seer : atharvaa~NgiraaH | Devta : agniH | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : bRRihaspatirma aakuutimaa~NgirasaH prati jaanaatu vaachametaam. yasya devaa devataaH sa.mbabhuuvuH sa supraNiitaaH kaamo anvetvasmaan .4.
Component Words : bRRihaspatiH. me. aa.akuutim. aa~NgirasaH. prati. jaanaatu. vaacham. etaam. yasya. devaaH. devataaH. sam.ababhuuvuH. saH. su.apraniitaaH. kaamaH. anu. etu. asmaan .4.4.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वाङ्गिराः | देवता : अग्निः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : बुद्धि बढ़ाने का उपदेश।
पदपाठ : बृह॒स्पतिः॑। मे॒। आऽकू॑तिम्। आ॒ङ्गि॒र॒सः। प्रति॑। जा॒ना॒तु॒। वाच॑म्। ए॒ताम्। यस्य॑। दे॒वाः। दे॒वताः॑। स॒म्ऽब॒भू॒वुः॒। सः। सु॒ऽप्रनी॑ताः। कामः॑। अनु॑। ए॒तु॒। अ॒स्मान् ॥४.४॥
पदार्थ : (आङ्गिरसः) ज्ञानवान् परमेश्वर का सेवक, (बृहस्पतिः) बृहस्पति [बड़ी विद्याओं का स्वामी पुरुष] (मे) मेरी (आकूतिम्) संकल्प शक्ति, (एताम्) इस (वाचम्) वाणी को (प्रति) प्रतीति के साथ (जानातु) जाने “(सुप्रणीताः) यथाविधि चलाये गये (देवाः) विद्वानों ने (यस्य) जिस [शुभ कामना] के (देवताः) दिव्य भावों [सूक्ष्मगुणों] को (संबभूवुः) सब प्रकार पाया है, (सः) वह (कामः) शुभ कामना (अस्मान्) हम को (अनु) अनुकूलता से (एतु) प्राप्त होवे” ॥४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :४−(बृहस्पतिः) बृहतीनां विद्यानां स्वामी पुरुषः (मे) मम (आकूतिम्) सङ्कल्पशक्तिम् (आङ्गिरसः) तस्येदम्। पा० ४।३।१२०। इत्यण्। अङ्गिरसो ज्ञानिनः परमेश्वरस्य सेवकः (प्रति) प्रतीत्या (जानातु) (वाचम्) वाणीम् (एताम्) वक्ष्यमाणाम् (यस्य) कामस्य (देवाः) विद्वांसः (देवताः) तस्य भावस्त्वतलौ। पा० ५।१।११९। इति तल् प्रत्ययः। देवभावान्। दिव्यगुणान् (संबभूवुः) भू प्राप्तौ−लिट्। सम्यक् प्रापुः (सः) तादृशः (सुप्रणीताः) यथाविधिप्रेरिता देवाः (कामः) शुभकामना (अनु) आनुकूल्येन (एतु) प्राप्नोतु (अस्मान्) ॥