Atharvaveda / 19 / 10 / 10
शं नो॑ दे॒वः स॑वि॒ता त्राय॑माणः॒ शं नो॑ भवन्तू॒षसो॑ विभा॒तीः। शं नः॑ प॒र्जन्यो॑ भवतु प्र॒जाभ्यः॒ शं नः॒ क्षेत्र॑स्य॒ पति॑रस्तु श॒म्भुः ॥ 10॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 10 | Paryay : | Mantra No : 10
In English:
Seer : brahmaa | Devta : mantroktaaH | Metre : gaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : sha.m no devaH savitaa traayamaaNaH sha.m no bhavantuuShaso vibhaatiiH. sha.m naH parjanyo bhavatu prajaabhyaH sha.m naH kShetrasya patirastu shambhuH . 10.
Component Words : sham. naH.devaH. savitaa. traayamaaNaH. sham. naH. bhavantu. uShasaH. vi.abhaatiiH. sham. naH. parjanyaH. bhavatu. pra.ajaabhyaH. sham. naH. kShetrasya. patiH. astu. sham.abhuH .10.10.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : सृष्टि के पदार्थों से उपकार लेने का उपदेश।
पदपाठ : शम्। नः॒।दे॒वः। स॒वि॒ता। त्राय॑माणः। शम्। नः॒। भ॒व॒न्तु॒। उ॒षसः॑। वि॒ऽभा॒तीः। शम्। नः॒। प॒र्जन्यः॑। भ॒व॒तु॒। प्र॒ऽजाभ्यः॑। शम्। नः॒। क्षेत्र॑स्य। पतिः॑। अ॒स्तु॒। श॒म्ऽभुः ॥१०.१०॥
पदार्थ : (देवः) प्रकाशमान (सविता) लोकों का चलानेवाला सूर्य (त्रायमाणः) रक्षा करता हुआ (नः) हमें (शम्) सुखदायक हो, (विभातीः) जगमगाती हुई (उषसः) प्रभात वेलाएँ (नः) हमें (शम्) सुखदायक (भवन्तु) हों। (पर्जन्य) सींचनेवाला मेघ (नः) हमें और (प्रजाभ्यः) प्रजाओं के लिये (शम्) सुखदायक (भवतु) हो, (शम्भुः) मङ्गलदाता (क्षेत्रस्य) खेत का (पतिः) स्वामी (नः) हमें (शम्) सुखदायक (अस्तु) हो ॥१०॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१०−(शम्) शान्तिप्रदः (नः) अस्मभ्यम् (देवः) प्रकाशमानः (सविता) लोकप्रेरकः सूर्यः (त्रायमाणः) रक्षन् (शम्) (नः) (भवन्तु) (उषसः) प्रभातवेलाः (विभातीः) विभात्यः। विशेषेण दीप्यमानाः (शम्) (नः) (पर्जन्यः) पर्जन्यः। उ० ३।१०३। पृषु सेचने-अन्यप्रत्ययः, षस्य जः। वृष्टिप्रदो मेघः (भवतु) (प्रजाभ्यः) प्रजानां हिताय (शम्) (क्षेत्रस्य) क्षि ऐश्वर्ये, निवासे च-ष्ट्रन्। शस्योत्पत्तिस्थानस्य (पतिः) स्वामी (अस्तु) (शम्भुः) मङ्गलप्रदः ॥