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Atharvaveda / 19 / 22 / 9

द्वि॒तीये॑भ्यः श॒ङ्खेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 9॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 22 | Paryay : | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : अङ्गिराः | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : आसुरी जगती | स्वर :

विषय : महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदपाठ : द्वि॒ती॒येभ्यः॑। श॒ङ्खेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२२.९॥

पदार्थ : (द्वितीयेभ्यः) दूसरे [सृष्टि के आदि की अपेक्षा अन्त में विद्यमान] (शङ्खेभ्यः) दर्शनीय गुणों के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥९॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :९−(द्वितीयेभ्यः) सृष्टेराद्यपेक्षया अन्ते वर्तमानेभ्यः (शङ्खेभ्यः) म०८। दर्शनीयगुणेभ्यः ॥