Atharvaveda / 19 / 22 / 15
शि॒खिभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 15॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 22 | Paryay : | Mantra No : 15
In English:
Seer : a~NgiraaH | Devta : mantroktaaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : shikhibhyaH svaahaa . 15.
Component Words : shikhi.abhyaH. svaahaa .22.15.
In Hindi:
ऋषि : अङ्गिराः | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : दैवी पङ्क्तिः | स्वर :
विषय : महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदपाठ : शि॒खिऽभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२२.१५॥
पदार्थ : (शिखिभ्यः) शिखाधारियों [चोटी-वालों, अथवा चोटी-वाले पर्वतादि के समान ऊँचे ब्रह्मज्ञानियों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१५−(शिखिभ्यः) व्रीह्यादिभ्यश्च। पा०५।२।११६। शिखा-इनि। शिखाधारिभ्यः, यद्वा शिखरयुक्तपर्वतादितुल्योन्नतेभ्यो ब्राह्मणेभ्यः ॥