Atharvaveda / 19 / 23 / 8
ए॑कादश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 8॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 8
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : pathyaabRRihatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ekaadasharchebhyaH svaahaa . 8.
Component Words : ekaadasha.aRRichebhyaH. svaahaa .23.8.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : ए॒का॒द॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.८॥
पदार्थ : (एकाशर्चेभ्यः) ग्यारह [प्राण, अपान, उदान, व्यान, समान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त, धनञ्जय दस प्राण और ग्यारहवें जीवात्मा] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥८॥"
भावार्थ : टिप्पणी :८−(एकादशर्चेभ्यः) म०१॥ प्राणापानोदानव्यानसमाननागकृर्मकृकलदेवदत्तधनञ्जया इति दश प्राणा एकादशो जीवात्मा, एतेषां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥