Atharvaveda / 19 / 23 / 13
षो॑डश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 13॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 13
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ShoDasharchebhyaH svaahaa . 13.
Component Words : ShoDasha.aRRichebhyaH. svaahaa .23.13.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : दैवी जगती | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : षो॒ड॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.१३॥
पदार्थ : (षोडशर्चेभ्यः) सोलह [प्राण, श्रद्धा, आकाश, वायु, प्रकाश, जल, पृथिवी, इन्द्रिय, मन, अन्न, वीर्य, तप, मन्त्र, कर्म, लोक और नाम−इन सोलह कलाओं] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१३॥ प्रश्नोपनिषद में सोलह कलाएँ इस प्रकार हैं [स प्राणमसृजत, प्राणाच्छ्रद्धा खं वायुर्ज्योतिरापः पृथिवीन्द्रियम्। मनोऽन्नमन्नाद् वीर्यं तपो मन्त्राः कर्म लोका लोकेषु च नाम च ॥ प्रश्न ६ श्लोक ४] उस [पुरुष] ने प्राण, प्राण से श्रद्धा [आस्तिक बुद्धि], आकाश, वायु, प्रकाश, जल, पृथिवी, इन्द्रिय [ज्ञानेन्द्रिय और कर्मेन्द्रिय] मन और अन्न को, अन्न से वीर्य, तप, मन्त्रों [ऋग्वेदादि चार वेदों] कर्म और लोकों में नाम को उत्पन्न किया ॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१३−(षोडशर्चेभ्यः) म०१। प्रश्नोपनिषदि प्रश्ने ६ श्लोके ४ प्रतिपादितानां प्राणश्रद्धादिषोडशकलानां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥