Atharvaveda / 20 / 3 / 3
ब्र॒ह्माण॑स्त्वा व॒यं यु॒जा सो॑म॒पामि॑न्द्र सो॒मिनः॑। सु॒ताव॑न्तो हवामहे ॥ 3॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 3
In English:
Seer : irimbiThiH | Devta : indraH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : brahmaaNastvaa vaya.m yujaa somapaamindra sominaH. sutaavanto havaamahe . 3.
Component Words : brahmaaNaH . tvaa . vayam . yujaa . soma.apaam . indra . sominaH . suta.avantaH. havaamahe .3.3.
In Hindi:
ऋषि : इरिम्बिठिः | देवता : इन्द्रः | छन्द : गायत्री | स्वर :
विषय : राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
पदपाठ : ब्र॒ह्माण॑: । त्वा॒ । व॒यम् । यु॒जा । सो॒म॒ऽपाम् । इ॒न्द्र॒ । सो॒मिन॑: । सु॒तऽव॑न्त:। ह॒वा॒म॒हे॒ ॥३.३॥
पदार्थ : (इन्द्र) हे इन्द्र ! [बड़े ऐश्वर्यवाले राजन्] (सोमपाम्) ऐश्वर्य के रक्षक (त्वा) तुझको (युजा) मित्रता के साथ (ब्रह्माणः) वेद जाननेवाले, (सोमिनः) ऐश्वर्यवाले, (सुतावन्तः) उत्तम पुत्रादि [सन्तानों] वाले (वयम्) हम (हवामहे) बुलाते हैं ॥३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :३−(ब्रह्माणः) वेदज्ञातारः (त्वा) त्वाम् (वयम्) प्रजागणः (युजा) सम्पदादिक्विप्। संयोगेन। मित्रभावेन (सोमपाम्) ऐश्वर्यरक्षकम्-दयानन्दभाष्ये, यजु० ८।३४ (इन्द्र) हे परमैश्वर्यवन् राजन् (सोमिनः) ऐश्वर्यवन्तः (सुतवन्तः) सुशिक्षितसन्तानयुक्ताः (हवामहे) आह्वयामः ॥