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Atharvaveda / 20 / 69 / 12

आदह॑ स्व॒धामनु॒ पुन॑र्गर्भ॒त्वमे॑रि॒रे। दधा॑ना॒ नाम॑ य॒ज्ञिय॑म् ॥12॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 69 | Paryay : | Mantra No : 12

In Hindi:

ऋषि : मधुच्छन्दाः | देवता : मरुद्गणः | छन्द : गायत्री | स्वर :

विषय : राजा और प्रजा के धर्म का उपदेश।

पदपाठ : आत् । अह॑ । स्व॒धाम् । अनु॑ । पुन॑: । ग॒र्भ॒ऽत्वम् । आ॒ऽई॒रि॒रे ॥ दधा॑ना: । नाम॑ । य॒ज्ञिय॑म् ॥६९.१२॥

पदार्थ : (आत्) फिर (अह) अवश्य (स्वधाम् अनु) अपनी धारण शक्ति के पीछे (यज्ञियम्) सत्कारयोग्य (नाम) नाम [यश] का (दधानाः) धारण करते हुए लोगों ने (पुनः) निश्चय करके (गर्भत्वम्) गर्भपन [सारपन, बड़े पद] को (एरिरे) सब प्रकार से पाया है ॥१२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :यह मन्त्र, आचुका है-अ० २०।४०।३ ॥ १२-अयं मन्त्रो व्याख्यातः-अ० २०।४०।३ ॥