Rigveda / 7 / 76 / 3
तानीदहा॑नि बहु॒लान्या॑स॒न्या प्रा॒चीन॒मुदि॑ता॒ सूर्य॑स्य । यत॒: परि॑ जा॒र इ॑वा॒चर॒न्त्युषो॑ ददृ॒क्षे न पुन॑र्य॒तीव॑ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 7 | Sukta : 76 | Mantra No : 3
In English:
Seer : vasiShThaH | Devta : uShaaH | Metre : nichRRittriShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : taaniidahaani bahulaanyaasanyaa praachiinamuditaa suuryasya . yataH pari jaara ivaacharantyuSho dadRRikShe na punaryatiiva .
Component Words : taani . it . ahaani . bahulaani . aasan . yaa . praachiinam . ut.aitaa . suuryasya . yataH . pari . jaaraH.aiva . aa.acharantii . uShaH . dadRRikShe . na . punaH . yatii.aiva . 7.76.3
In Hindi:
ऋषि : वसिष्ठः | देवता : उषाः | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : तानि॑ । इत् । अहा॑नि । ब॒हु॒लानि॑ । आ॒स॒न् । या । प्रा॒चीन॑म् । उत्ऽइ॑ता॒ । सूर्य॑स्य । यतः॑ । परि॑ । जा॒रःऽइ॑व । आ॒ऽचर॒न्ती । उषः॑ । द॒दृ॒क्षे । न । पुनः॑ । य॒तीऽइ॑व ॥ ७.७६.३
पदार्थ : (तानि इत् अहानि) वह दिन के समान प्रकाशरूप (बहुलानि) अनेक प्रकार के तेज (आसन्) दृष्टिगत होते हैं, (या) जो (सूर्यस्य) स्वतःप्रकाश परमात्मा के (प्राचीनं) प्राचीन स्वरूप को (उदिता) प्राप्त है, (यतः) जिससे (परिजार इव) अग्नि के समान (उषः) तेज (आचरन्ती) निकलते हुए (ददृक्षे) देखे जाते हैं, (यतीव) व्यभिचारी पदार्थों के समान (पुनः न) फिर नहीं ॥३॥
भावार्थ : जिस प्रकार अग्नि से सहस्रों प्रकार की ज्वालायें उत्पन्न होती रहती हैं, इसी प्रकार स्वतःप्रकाश परमात्मा के स्वरूप से तेज की रश्मियें सदैव देदीप्यमान होती रहती हैं, या यों कहो कि स्वतः-प्रकाश परमात्मा की ज्योति सदैव प्रकाशित होती रहती है। जैसे पदार्थों के अनित्य गुण उन पदार्थों से पृथक् हो जाते वा नाश को प्राप्त हो जाते हैं, इस प्रकार परमात्मा के प्रकाशरूप गुण का उससे कदापि वियोग नहीं होता अर्थात् परमात्मा के गुण विकारी नहीं, यह इस मन्त्र का भाव है ॥३॥
In Sanskrit:
ऋषि : वसिष्ठः | देवता : उषाः | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : तानि॑ । इत् । अहा॑नि । ब॒हु॒लानि॑ । आ॒स॒न् । या । प्रा॒चीन॑म् । उत्ऽइ॑ता॒ । सूर्य॑स्य । यतः॑ । परि॑ । जा॒रःऽइ॑व । आ॒ऽचर॒न्ती । उषः॑ । द॒दृ॒क्षे । न । पुनः॑ । य॒तीऽइ॑व ॥ ७.७६.३
भावार्थ :