Rigveda / 8 / 4 / 8
स॒व्यामनु॑ स्फि॒ग्यं॑ वावसे॒ वृषा॒ न दा॒नो अ॑स्य रोषति । मध्वा॒ सम्पृ॑क्ताः सार॒घेण॑ धे॒नव॒स्तूय॒मेहि॒ द्रवा॒ पिब॑ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 4 | Mantra No : 8
In English:
Seer : devaatithiH kaaNvaH | Devta : indra: | Metre : nichRRitpa~Nkti | Tone : pa~nchamaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : savyaamanu sphigya.m vaavase vRRiShaa na daano asya roShati . madhvaa sampRRiktaaH saaragheNa dhenavastuuyamehi dravaa piba .
Component Words : savyaam . anu . sphigyam . vavase . vRRiShaa . na . daanaH . asya . roShati . madhvaa . sam.apRRiktaaH . saaragheNa . dhenavaH . tuuyam . aa . ihi . drava . piba . 8.4.8
In Hindi:
ऋषि : देवातिथिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृत्पङ्क्ति | स्वर : पञ्चमः
विषय :
पदपाठ : स॒व्याम् । अनु॑ । स्फि॒ग्य॑म् । व॒व॒से॒ । वृषा॑ । न । दा॒नः । अ॒स्य॒ । रो॒ष॒ति॒ । मध्वा॑ । सम्ऽपृ॑क्ताः । सा॒र॒घेण॑ । धे॒नवः॑ । तूय॑म् । आ । इ॒हि॒ । द्रव॑ । पिब॑ ॥ ८.४.८
पदार्थ : (वृषा) कामनाओं की वर्षा करनेवाले आप (सव्याम्, स्फिग्यम्, अनु) बाएँ अङ्ग से ही (वावसे) सबको अभिभूत किये हैं (अस्य) इस कर्मयोगी के (दानः) भाग का दाता सेवक (न, रोषति) कभी इससे रुष्ट नहीं होता (सारघेण) सरघा=मधुमक्षिका से किये हुए (मध्वा) मधु से (संपृक्ताः) संमिश्रित (धेनवः) गव्यपदार्थ आपके लिये विद्यमान हैं। आप (तूयम्) शीघ्र (आगहि) आइये (द्रव) द्रुतगति से आइये (पिब) सिद्धरस को पीजिये ॥८॥
भावार्थ : सब कामनाओं को पूर्ण करनेवाले कर्मयोगिन् ! आप वाम अङ्ग से ही सब शत्रुओं को वशीभूत करनेवाले हैं । जो प्रसन्नतापूर्वक आपका भाग देता है, उसका आप सदा ही कल्याण करते और अनाज्ञाकारी का दमन करते हैं । हे भगवन् ! यह शहद और दुग्धादि पदार्थों से मिश्रित उत्तमोत्तम खाद्य पदार्थ आपके लिये सिद्ध किये हुए रखे हैं, आप शीघ्र आकर इनका सेवन कीजिये ॥८ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : देवातिथिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृत्पङ्क्ति | स्वर : पञ्चमः
पदपाठ : स॒व्याम् । अनु॑ । स्फि॒ग्य॑म् । व॒व॒से॒ । वृषा॑ । न । दा॒नः । अ॒स्य॒ । रो॒ष॒ति॒ । मध्वा॑ । सम्ऽपृ॑क्ताः । सा॒र॒घेण॑ । धे॒नवः॑ । तूय॑म् । आ । इ॒हि॒ । द्रव॑ । पिब॑ ॥ ८.४.८
भावार्थ :