Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 8 / 6 / 4

सम॑स्य म॒न्यवे॒ विशो॒ विश्वा॑ नमन्त कृ॒ष्टय॑: । स॒मु॒द्राये॑व॒ सिन्ध॑वः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 6 | Mantra No : 4

In Hindi:

ऋषि : वत्सः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : सम् । अ॒स्य॒ । म॒न्यवे॑ । विशः॑ । विश्वाः॑ । न॒म॒न्त॒ । कृ॒ष्टयः॑ । स॒मु॒द्राय॑ऽइव । सिन्ध॑वः ॥ ८.६.४

पदार्थ : (अस्य, मन्यवे) इस परमात्मा के प्रभाव के लिये (विश्वाः) सब (विशः) चेष्टा करती हुईं (कृष्टयः) प्रजाएँ (समुद्राय, सिन्धवः, इव) जैसे समुद्र के लिये नदियें इसी प्रकार (संनमन्त) स्वयं ही संनत होती हैं ॥४॥

भावार्थ : इस मन्त्र का भाव यह है कि जिस प्रकार नदियें स्वाभाविक ही समुद्र की ओर प्रवाहित होती हैं, इसी प्रकार परमात्मा के प्रभाव से प्रवाहित हुई सब प्रजाएँ उसकी ओर आकर्षित हो रही हैं, क्योंकि संतप्त प्रजाओं को शान्तिप्रदान करने का आधार एकमात्र परमात्मा ही है, अन्य नहीं ॥४ ॥