Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 8 / 6 / 12

ये त्वामि॑न्द्र॒ न तु॑ष्टु॒वुॠष॑यो॒ ये च॑ तुष्टु॒वुः । ममेद्व॑र्धस्व॒ सुष्टु॑तः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 6 | Mantra No : 12

In Hindi:

ऋषि : वत्सः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : ये । त्वाम् । इ॒न्द्र॒ । न । तु॒स्तु॒वुः । ऋष॑यः । ये । च॒ । तु॒स्तु॒वुः । मम॑ । इत् । व॒र्ध॒स्व॒ । सुऽस्तु॑तः ॥ ८.६.१२

पदार्थ : (इन्द्रः) हे परमात्मन् ! (ये, ऋषयः) जो हममें से सूक्ष्मदर्शी महर्षि (त्वां, न तुष्टुवुः) आपकी स्तुति नहीं करते (च) और (ये, तुष्टुवुः) जो करते हैं, दोनों प्रकार से (सुष्टुतः) सम्यक् स्तुति किये गये आप (मम, इत्, वर्धस्व) हममें वृद्धि को प्राप्त हों ॥१२॥

भावार्थ : हे परमात्मदेव ! हममें से जो महर्षि आपकी उपासना में सदैव तत्पर रहते और जो नहीं करते हैं, उन दोनों को समान फल प्राप्त कराएँ, क्योंकि वे दोनों ही तप, अनुष्ठान और सम्यक् स्तुतियों से अधिकार प्राप्त कर चुके हैं ॥१२ ॥