Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 8 / 8 / 2

आ नू॒नं या॑तमश्विना॒ रथे॑न॒ सूर्य॑त्वचा । भुजी॒ हिर॑ण्यपेशसा॒ कवी॒ गम्भी॑रचेतसा ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 8 | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : सध्वंशः काण्वः | देवता : अश्विनौ | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : आ । नू॒नम् । या॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । रथे॑न । सूर्य॑ऽत्वचा । भुजी॒ इति॑ । हिर॑ण्यऽपेशसा । कवी॒ इति॑ । गम्भी॑रऽचेतसा ॥ ८.८.२

पदार्थ : (भुजी) हे उत्कृष्ट पदार्थों के भाग करनेवाले (हिरण्यपेशसा) हिरण्यभूषित (कवी) सूक्ष्मपदार्थों के जाननेवाले (गम्भीरचेतसा) गम्भीरबुद्धिवाले (अश्विना) व्यापक आप (सूर्यत्वचा) सूर्यसदृश आस्तरणवाले (रथेन) रथ द्वारा (नूनम्) निश्चय (आयातम्) आवें ॥२॥

भावार्थ : इस मन्त्र में सेनाध्यक्ष तथा सभाध्यक्ष की प्रशंसा करते हुए उनका आह्वान कथन किया है कि हे सेनाध्यक्ष तथा सभाध्यक्ष ! आप कवी=प्रकृति के कार्य्यजात सूक्ष्मपदार्थों के ज्ञाता, बुद्धिमान् और विस्तृत ऐश्वर्य्यवाले हैं । कृपा करके हमारे यज्ञ को प्राप्त होकर अपने उपदेश द्वारा हमें भी उक्तगुणसम्पन्न करें ॥२ ॥