Rigveda / 8 / 11 / 8
पु॒रु॒त्रा हि स॒दृङ्ङसि॒ विशो॒ विश्वा॒ अनु॑ प्र॒भुः । स॒मत्सु॑ त्वा हवामहे ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 11 | Mantra No : 8
In English:
Seer : vatsaH kaaNvaH | Devta : agniH | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : purutraa hi sadRRi~N~Nasi visho vishvaa anu prabhuH . samatsu tvaa havaamahe .
Component Words : puru.atraa . hi . sa.adRRi~N . asi . vishaH . vishvaaH . anu . pra.abhuH . samat.asu . tvaa . havaamahe . 8.11.8
In Hindi:
ऋषि : वत्सः काण्वः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : पु॒रु॒ऽत्रा । हि । स॒ऽदृङ् । असि॑ । विशः॑ । विश्वाः॑ । अनु॑ । प्र॒ऽभुः । स॒मत्ऽसु॑ । त्वा॒ । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥ ८.११.८
पदार्थ : हे परमात्मन् ! (पुरुत्रा, हि) आप सर्वत्र ही (सदृङ्, असि) समान द्रष्टा हैं (विश्वाः, विशः) इससे सब प्रजाओं के (अनु) प्रति (प्रभुः) प्रभु हो रहे हैं (त्वा) इससे आपको (समत्सु) संग्रामों में (हवामहे) आह्वान करते हैं ॥८॥
भावार्थ : हे परमेश्वर ! आप सर्वत्र समानरूप से विद्यमान होने के कारण सर्वद्रष्टा होने से सबके प्रभु=स्वामी हैं, इसी से क्षात्रधर्म में प्रवृत्त योद्धा लोग युद्ध में आपका आश्रयण करते हैं ॥८ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : वत्सः काण्वः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : पु॒रु॒ऽत्रा । हि । स॒ऽदृङ् । असि॑ । विशः॑ । विश्वाः॑ । अनु॑ । प्र॒ऽभुः । स॒मत्ऽसु॑ । त्वा॒ । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥ ८.११.८
भावार्थ :