Rigveda / 8 / 13 / 9
उ॒तो पति॒र्य उ॒च्यते॑ कृष्टी॒नामेक॒ इद्व॒शी । न॒मो॒वृ॒धैर॑व॒स्युभि॑: सु॒ते र॑ण ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 13 | Mantra No : 9
In English:
Seer : naaradaH kaaNvaH | Devta : indra: | Metre : uShNik | Tone : RRIShabhaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : uto patirya uchyate kRRiShTiinaameka idvashii . namovRRidhairavasyubhiH sute raNa .
Component Words : uto iti . patiH . yaH . uchyate . kRRiShTiinaam . ekaH . it . vashii . namaH.avRRidhaiH . avasyu.abhiH . sute . raNa . 8.13.9
In Hindi:
ऋषि : नारदः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : उष्णिक् | स्वर : ऋषभः
विषय : अब कल्याणार्थ परमात्मा की उपासना करना कथन करते हैं।
पदपाठ : उ॒तो इति॑ । पतिः॑ । यः । उ॒च्यते॑ । कृ॒ष्टी॒नाम् । एकः॑ । इत् । व॒शी । न॒मः॒ऽवृ॒धैः । अ॒व॒स्युऽभिः॑ । सु॒ते । र॒ण॒ ॥ ८.१३.९
पदार्थ : (उतो) और (यः) जो परमात्मा (वशी) सबको वश में रखनेवाला (कृष्टीनाम्) सब प्रजाओं का (एकः, इत्, पतिः) एक ही पालक (उच्यते) कहा जाता है, हे उपासक (नमोवृधैः, अवस्युभिः) रक्षा को चाहनेवाले स्तोताओं द्वारा (सुते) साक्षात्कार करने पर (रण) हे उपासक ! उसकी स्तुति करो ॥९॥
भावार्थ : हे उपासक जनो ! तुम स्तोताओं द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार कर उसकी स्तुति, प्रार्थना तथा उपासना में प्रवृत्त होओ, क्योंकि एकमात्र परमात्मा ही सबका रक्षक, सबको वश में रखनेवाला और एक वही सब प्रजाओं का पालक है ॥९ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : नारदः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : उष्णिक् | स्वर : ऋषभः
विषय : सम्प्रति परमात्मोपासना वर्ण्यते।
पदपाठ : उ॒तो इति॑ । पतिः॑ । यः । उ॒च्यते॑ । कृ॒ष्टी॒नाम् । एकः॑ । इत् । व॒शी । न॒मः॒ऽवृ॒धैः । अ॒व॒स्युऽभिः॑ । सु॒ते । र॒ण॒ ॥ ८.१३.९
भावार्थ :