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Rigveda / 8 / 32 / 4

प्रति॑ श्रु॒ताय॑ वो धृ॒षत्तूर्णा॑शं॒ न गि॒रेरधि॑ । हु॒वे सु॑शि॒प्रमू॒तये॑ ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 32 | Mantra No : 4

In Hindi:

ऋषि : मेधातिथिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : प्रति॑ । श्रु॒ताय॑ । वः॒ । धृ॒षत् । तूर्णा॑शम् । न । गि॒रेः । अधि॑ । हु॒वे । सु॒ऽशि॒प्रम् । ऊ॒तये॑ ॥ ८.३२.४

पदार्थ :

भावार्थ :