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Rigveda / 8 / 43 / 15

स त्वं विप्रा॑य दा॒शुषे॑ र॒यिं दे॑हि सह॒स्रिण॑म् । अग्ने॑ वी॒रव॑ती॒मिष॑म् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 43 | Mantra No : 15

In Hindi:

ऋषि : विरूप आङ्गिरसः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : सः । त्वम् । विप्रा॑य । दा॒शुषे॑ । र॒यिम् । दे॒हि॒ । स॒ह॒स्रिण॑म् । अग्ने॑ । वी॒रऽव॑तीम् । इष॑म् ॥ ८.४३.१५

पदार्थ :

भावार्थ :