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Rigveda / 8 / 45 / 4

आ बु॒न्दं वृ॑त्र॒हा द॑दे जा॒तः पृ॑च्छ॒द्वि मा॒तर॑म् । क उ॒ग्राः के ह॑ शृण्विरे ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 45 | Mantra No : 4

In Hindi:

ऋषि : त्रिशोकः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : आ । बु॒न्दम् । वृ॒त्र॒ऽहा । द॒दे॒ । जा॒तः । पृ॒च्छ॒त् । वि । मा॒तर॑म् । के । उ॒ग्राः । के । ह॒ । शृ॒ण्वि॒रे॒ ॥ ८.४५.४

पदार्थ :

भावार्थ :