Rigveda / 9 / 2 / 9
अ॒स्मभ्य॑मिन्दविन्द्र॒युर्मध्व॑: पवस्व॒ धार॑या । प॒र्जन्यो॑ वृष्टि॒माँ इ॑व ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 2 | Mantra No : 9
In English:
Seer : medhaatithiH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : asmabhyamindavindrayurmadhvaH pavasva dhaarayaa . parjanyo vRRiShTimaa.N iva .
Component Words : asmabhyam . indo iti . indra.ayuH . madhvaH . pavasva . dhaarayaa . parjanyaH . vRRiShTimaan.aiva . 9.2.9
In Hindi:
ऋषि : मेधातिथिः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : अ॒स्मभ्य॑म् । इ॒न्दो॒ इति॑ । इ॒न्द्र॒ऽयुः । मध्वः॑ । प॒व॒स्व॒ । धार॑या । प॒र्जन्यः॑ । वृ॒ष्टि॒मान्ऽइ॑व ॥ ९.२.९
पदार्थ : (इन्दो) हे परमैश्वर्य्ययुक्त और (इन्द्रयुः) सर्वव्यापक परमात्मन् ! (मध्वः) आनन्द की (धारया) वृष्टि से (वृष्टिमान्) वर्षा करनेवाले (पर्जन्यः) मेघ के (इव) समान आप (अस्मभ्यम्) हमको (पवस्व) पवित्र करे ॥९॥
भावार्थ : जिस प्रकार मेघ अपनी वृष्टि से भूमि का सिञ्चन कर देता है, उसी प्रकार हे परमात्मन् ! आप अपनी आनन्दरूप वृष्टि से हमको पवित्र तथा सिक्त करें ॥९॥
In Sanskrit:
ऋषि : मेधातिथिः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : अ॒स्मभ्य॑म् । इ॒न्दो॒ इति॑ । इ॒न्द्र॒ऽयुः । मध्वः॑ । प॒व॒स्व॒ । धार॑या । प॒र्जन्यः॑ । वृ॒ष्टि॒मान्ऽइ॑व ॥ ९.२.९
भावार्थ :