Rigveda / 9 / 3 / 8
ए॒ष दिवं॒ व्यास॑रत्ति॒रो रजां॒स्यस्पृ॑तः । पव॑मानः स्वध्व॒रः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 3 | Mantra No : 8
In English:
Seer : shunaH shepaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : eSha diva.m vyaasarattiro rajaa.msyaspRRitaH . pavamaanaH svadhvaraH .
Component Words : eShaH . divam . vi . aa . asarat . tiraH . rajaa.msi . aspRRitaH . pavamaanaH . su.aadhvaraH . 9.3.8
In Hindi:
ऋषि : शुनः शेपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : ए॒षः । दिव॑म् । वि । आ । अ॒स॒र॒त् । ति॒रः । रजां॑सि । अस्पृ॑तः । पव॑मानः । सु॒ऽअ॒ध्व॒रः ॥ ९.३.८
पदार्थ : (एषः) वही परमात्मा (दिवम्) द्युलोक को (व्यासरत्) प्राप्त है (रजांसि) परमाणु में लोक-लोकान्तरों को (तिरः) आच्छादन करके (अस्पृतः) अविनाशी भाव से (पवमानः) पवित्र और (स्वध्वरः) अहिंसकरूप से विराजमान है ॥८॥
भावार्थ : वह नित्य-शुद्ध-बुद्ध-मुक्तस्वभाव परमात्मा सर्वत्र विराजमान है और उसी की सत्ता से सब लोक-लोकान्तर परिभ्रमण करते हैं ॥८॥
In Sanskrit:
ऋषि : शुनः शेपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : ए॒षः । दिव॑म् । वि । आ । अ॒स॒र॒त् । ति॒रः । रजां॑सि । अस्पृ॑तः । पव॑मानः । सु॒ऽअ॒ध्व॒रः ॥ ९.३.८
भावार्थ :