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Rigveda / 9 / 8 / 8

वृ॒ष्टिं दि॒वः परि॑ स्रव द्यु॒म्नं पृ॑थि॒व्या अधि॑ । सहो॑ नः सोम पृ॒त्सु धा॑: ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 8 | Mantra No : 8

In Hindi:

ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : वृ॒ष्टिम् । दि॒वः । परि॑ । स्र॒व॒ । द्यु॒म्नम् । पृ॒थि॒व्याः । अधि॑ । सहः॑ । नः॒ । सो॒म॒ । पृ॒त्ऽसु । धाः॒ ॥ ९.८.८

पदार्थ : (सोम) हे परमात्मन् ! (दिवः) द्युलोक से (वृष्टिम्, परिस्रव) वृष्टि द्वारा (द्युम्नम्) अन्नादि एश्वर्यों को दीजिये और (पृथिव्याः अधि) सर्वत्र पृथिवी में (नः) हमको (सहः) बल देकर (पृत्सु धाः) युद्धों में विजयी करिये ॥८॥

भावार्थ : जो लोग परमात्मविश्वासी होते हैं, परमात्मा उनको युद्धों में विजयी और धनादि ऐश्वर्यों से नानाविधैश्वर्यसम्पन्न करता है ॥८॥