Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 9 / 10 / 7

स॒मी॒ची॒नास॑ आसते॒ होता॑रः स॒प्तजा॑मयः । प॒दमेक॑स्य॒ पिप्र॑तः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 10 | Mantra No : 7

In Hindi:

ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : स॒मी॒ची॒नासः॑ । आ॒स॒ते॒ । होता॑रः । स॒प्तऽजा॑मयः । प॒दम् । एक॑स्य । पिप्र॑तः ॥ ९.१०.७

पदार्थ : (सप्त, जामयः) यज्ञकर्म में सङ्गति रखनेवाले (होतारः) होता लोग (समीचीनासः) यज्ञकर्म में जो निपुण हैं, वे (एकस्य, पदम्) एक परमात्मा के पद को जब (आसते) ग्रहण करते हैं, तो वे (पिप्रतः) यज्ञ को सम्पूर्ण करते हैं ॥७॥

भावार्थ : जो लोग एक परमात्मा की उपासना करते हैं, उन्हीं के सब कामों की पूर्ति होती है। तात्पर्य यह है कि ईश्वरपरायण लोगों के कार्यों में कदापि विघ्न नहीं होता ॥७॥