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Rigveda / 9 / 11 / 9

पव॑मान सु॒वीर्यं॑ र॒यिं सो॑म रिरीहि नः । इन्द॒विन्द्रे॑ण नो यु॒जा ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 11 | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : पव॑मान । सु॒ऽवीर्य॑म् । र॒यिम् । सो॒म॒ । रि॒री॒हि॒ । नः॒ । इन्दो॒ इति॑ । इन्द्रे॑ण । नः॒ । यु॒जा ॥ ९.११.९

पदार्थ : (पवमान) हे सब को पवित्र करनेवाले ! (सुवीर्यम्) सुन्दर बल को (रयिम्) और धन को (नः रिरीहि) हमको देवें (इन्दो) हे सर्वप्रकाशक ! (इन्द्रेण) परमैश्वर्य के साथ (नः युजा) हमको युक्त करें (सोम) आप सौम्यस्वभाववाले हैं ॥९॥

भावार्थ : जो लोग सत्कर्मी बनकर ईश्वरपरायण होते हैं, परमात्मा सर्वोपरि ऐश्वर्य का उन्हीं को दान देता है ॥९॥३७॥ यह ग्यारहवाँ सूक्त और सैंतीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥ अब उक्त परमात्मा को यज्ञादि कर्मों का कर्तारूप से वर्णन करते हैं।